बीती रात मेरे पड़ोस के,
घर का कीमती सामान चोरी हो गया।
जिस बस स्टाप से बस पकड़ता था,
उसका ढाचा चोरी हो गया।
बिजली का तार चोरी हो गया,
जिससे रोसन होता था मेरा,
मोहल्ला ,
सडको पर लगा अलकतरा भी ,
चोरी हो गया।
यारो चोरी होने की लिस्ट,
यहाँ से सुरु होती है।
धन - दौलत के बाद ,
कला - संस्कृति, रहन -सहन ,
खान - पान , साहित्य ..........
सब कुछ चोरी हो रहा।
यहाँ तक भी थी ठीक था
,हद तो तब हो गई जब मेरी,
महबूबा ने भी कह दिया,
"maine uska dil chura लिया"
अब मैं परेसान हो गया,
इश लिस्ट की लम्बाई देख के,
और सोच में पड़ गया,
आख़िर सब तो चोरी का ही है तो,
ओरिजनल कया है?
तो ओरिजनल kaya hai
.........................!
"Azad Sikander"
3 comments:
प्रिय मित्र
सादर अभिवादन
आपके ब्लाग पर रचनाएं पढ़कर हार्दिक प्रसन्नता हुई। आप इन्हें प्रकाशित कराने के लिए अवश्य ही भेजं। यदि पत्रिकाओं की समीक्षा के साथ साथ उनके पते भी चाहिए हो तो मेरे ब्लाग पर अवश्य ही पधारें। आप निराश नहीं होंगे।
अखिलेश शुक्ल्
http://katha-chakra.blogspot.com
बहुत बढिया ...
pani se le kar naali tak , sab may milwat hai..... original to ab hum bhi nahi rahe .....agar duniya may kuch original hai to bhrastachar, bhook, berozgari, gareebi , ashikhsa list lambi hai.... per is original se hum bach bhi nahi sakte . Accha vyang hai aapka... badhiya....
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