Saturday, October 27, 2007

क्या दे रहा हुँ उनको.......?

क्या दे रहा हुँ उनको(माता-पिता),
जिनके दम पर खड़ा हुँ,
कुछ नहीं शिवाए दुःख के,

उनकी फिदरत सी बन गई है
दुखो को सह कर सुख देना,
हमारी फिदरत बन गई है
सुखो को भोगते हुए
उनको दुःख देना,

ऐसा क्युँ करता हुँ,
क्या यह सही है?
नहीं फिर भी ऐसा
करता हुँ,

ये संस्कार तो नहीं दिया था,
फिर भी.........
क्यों ले जाती हैं अक्छाइयाँ अपने से दूर।
क्यु बुराइयाँ खिचंती कल्लाइयों अपनी और।


"Azad Sikander"

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