लोग नकारते हैं हमें,
पुछ्ते हैं क्या जरुरत हैं आपकी,
क्या करते हैं आप हमारे लिए,
आप तो बस कल्पना लोक
में खोये विचरते हैं
क्या सच हैं यह?
नहीं,
हम आइना हैं,
वो आइना नहीं
जिसमे बाहरी रूप दिखता हैं,
वो आइना हैं जिसमे आपके
भीतर का रुप दिखता हैं
देख कर डरते हैं आप,
चीखते हैं, चिलाते हैं,
आँखे चुराते हैं
देखो सविकारो,
महसूस करो
और बदलो अपने आप को
मेरे दिखाए आइना में
नहीं करोगे जो ऐसा
परलय ले डूबेगी तुम्हे,
समय हैं रोक दो इसे
और जान लो आप
हम काल्पनिक नहीं,
आपके आइना हैं।
"Azad Sikander"
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