Thursday, October 25, 2007

फिर भी भेजते है हम “उनको” संसद।

वे वादा करते है,
हम आपके हितेशी है,
मांगते है वोट,
हाथ जोड़ कर,
बेटा बन कर,

जीत कर बन जाते है बाप,
और गर्व से कहते है,
कोन है आप!
पहचानता नहीं आपको!
फिर भी भेजते है हम,
“उनको” संसद।

"Aazad Sikander"

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