मेरी चुड़ियों को एक
दाग़ कह कर , तुमने,
“उनकी” दस्ता सुना दी,
उनके परेशानियों को कर,
उजागर अपनी पहचान बना ली,
लेकिन तुमने कभी ये सोचा,
है कि नन्ही कल्लाइयाँ क्यो ,
लगी है कल्लाइयाँ कि शोभा ,
बढ़ाने में?
यह उनकी मजदूरी,
जो शिक्क्षा से भी है जरुरी,
शिक्षा के लिए साधन नहीं है,
लेकिन अपने परिवार पालने का हुनर है
क्या तुम मिटा सकते हो,
उसके परिवार के भूख को,
जो उनके कलम के हाथ तत्काल नहीं दे सकते,
क्या साधन को तुम उपलब्ध ,
करोगे
जो “उनकी” है माँग।
"Deb Nandan Rajak"
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