अनुसूचित जाती व जनजाति को,
मिलगा आजादी के कुछ वर्षो तक,
आरछ्न का लाभ
नुमाइन्दे हमारे आजादी के इतने
वषो के बाद भी सकते रहे वोट कि
आग में कुर्सी कि भूख बढ़ा-बड़ा
आरछन कि तारीख
phir
हमे भी दो हमारे आबादी
के बराबर आरछन ,
हमारी हैं बहुमत
अंगाडे पैसे से बलवान तो हम संख्या में
लोकक्तंत्र का हैं सूत्र संख्या
बहुत दबे हम ,
बस अब दो हमे आरछन का लाभ
वाँहः भाई खूब कहे
क्या निकला हैं उपाय
मेहनत से बचने का
भाई से भाई को बाटने का
गुलामी कि दस्ता को बुलावो देने का
मुद्दतो बाद मिली हैं स्वछः हवा में
साँस लाने का अवसर
वह भी खोना चाहते हैं आप
आरछन जैसे वाइरस को बुला कर
अब तक SC, ST और आज OBC
कल आर्थिक पिछडे ............
रोको रोको इसे रोको
ठुंठों अन्य मार्ग
बनाओ ससक्त अपने को
आरछन नहीं संसाधन चाहिऐ हमें
"Azad Sikander"
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