Wednesday, December 5, 2007

प्रेमी प्रेमीका का प्रेम भी..........

प्रेमी प्रेमीका का प्रेम भी,
अजीब प्रेम प्रसंग हैं
हर प्रेमी जानने को रहता है ,
बेकरार की मेरी प्रमिका के

दिल में कितनी चाहत है मेरे लिए
क्यो करती है मुझ से प्रेम
सारी दुनिया में से मैं ही
क्यो बसता हुँ उसके दिल में?

ठीक यही ,
हर प्रेमीका अपने प्रेमी
से जानने को रहती हैं बेकरार

अगर प्रेमी – प्रमिका में से
एक भी हुआ कवी .......
जो दुनिया भर की बाते
कहता हो अपने कविता में
हर भावनाओं को ढालता हो शब्दो में

सिवाए इसके जो प्रेमिका
सुनना या जानना चाहाती हैं ...
तो हुआ गजब

कैसे कोई प्रमी सटीक कहे
चाहे वो कवी ही क्यो न हो
इन –in कारण से जान छिड़कता हुं तुम पर

प्यार दिल से होता है
जो भावनाओ से भरा हैं,
ये किसी पर भी मोहित हो जाये
जैसे मजनू का दिल लैला पर

दिमाग से नही होता प्यार
सोच-विचार कर
वरना प्यार –payar न होकर
सम्झोता हो जाये

प्रेम कोई वस्तु होती तो तोल कर
कोई भी बता दे की
मैं इतना करता हुं प्यार

मत पूछो क्यो ,
कितना और कब से करता हुं प्रेम
बस मैं यहीं कह सकता हुं
तुम से करता हुं प्रेम,
और सिर्फ तुम से.........

“Azad Sikander”

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