शायद
तुम अपने बटुआ में पड़े पैसे के नशे में,
चमचमाती कार में बैठे खुबसूरत ,
बीबी की खूबसूरती के नशे में,
आली सान बंगला होन के नशे में,
बाप के जायज या नाजायज पॉवर के नशे में,
या झूटी सानो साकोत के नशे में ,
आदि- आदि,
मैं तो चूर हुँ,
अपनी खाली बटुआ को छिपा कर,
फटे कपड़ो को छिपा कर,
इलाज के इलाज को छिपा कर,
अपने ना - ना प्रकार के मजबूरियों को छिपा कर ,
आदि- आदि ....को छिपा कर,
दारू के दो पैक पि कर, उसके नशे में ,
"Azad Sikander"
5 comments:
हिंदी लिखाडि़यों की दुनिया में आपका स्वागत। खूब लिखे। अच्छा लिखे। हजारों शुभकामंनाएं
assalam alaikum, bahut khoob! aapki qalam such aur insaaf ki nazar ho.aamin.kabhi fursat mile to http://deen-dunya.blogspot.com/ ki taraf bhi aayen.
बहुत सुंदर...आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे .....हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं
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