Tuesday, March 10, 2009

"जिंदगी है अनमोल"

मेरी - तुम्हारी, उसकी- उसका ,
हम सभी की जिंदगी,
मेरी "जान" की लटो की तरह है।

जैसे कंघी उलझे लटो को सुलझाती है,
और हवा का झोका,
उसे पुनः उलझती है।

ठीक ऐसे ही हम पल- पल ,
जिंदगी के उलझे सवालो को,
तरह- तरह से सुलझाते है ,
एक पल सुलझती है तो दुसरे पल
पुनः उलझ जाती है
नए सवालो से।

जिंदगी के ये उलझे सवाल,
और उसके सुलझाने की कोसिस
उलझन- सुलझन का रोचक खेल
बनती है हमारी जिंदगी को।

यह उलझन- सुलझन खेल,
हमें एहसास दिलाती है,
हम जिन्दा है , जिंदगी जीने के लिए है
मुह मोड़ने के लिए नही।

जियो दिलखोल के जियो,
"जिंदगी है अनमोल"।

"Azad Sikander"

4 comments:

MANVINDER BHIMBER said...

आपको व आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएं।

मोहिन्दर कुमार said...

आपको तथा आपके परिवार को होली की शुभकामनाएं. ईश्वर आपके जीवन में उल्लास और मनचाहे रंग भरें

neeshoo said...

मेरी तरफ से रंगों के त्यौहार होली की शुभकामनाएं।

Manu said...

Acha likha hey bhai!!

Zindagi agar sulajh ke reh jaye toh phir kya maza hey
uske ulajh ke rehne mein hi zindagi ka nasha hey!!

Aur kitna padoge bhai!!

Khush raho