मेरे जेब में पड़े चंद सिक्को की
खनखनाहट कुछ कहती हैं
पैदल चलने के दरमाया
निरंतर गिरते पैसो के मूल्य के दौर में
खुशी की वह गीत
जिसे अर्जित करने में
जलाया दिन-भर शरीर का
खून जिससे मिलेगा
आज शाम और कल सुबह का
नून - भात
“मुझे और सिर्फ मुझे,”
रात के सोने से पहले तक
और भोर जल्दी जगने के बाद ,
पौ फटने तक का
दीया में तेल,
सप्ताह भर काम करने के बाद
निया - निया बचा कर
फटे कपड़ो को धोने का साबुन,
बेमेल चप्पलो को मरमत कराने का साहस
मरे जेब में खनकते सिक्के
कुछ और भी कहती हैं
पूरे परिवार की नून-भात
न खरीदने की अछमता,
चंद मिले के लिये
ऑटो भाडा न देने की छमता,
शुद्ध पानी की
पहूच की कमी का एहसास,
जिससे होती अधिकतम बीमारियाँ,
फिर भी मरे जेब में
खनकते सिक्के कुछ कहती है
चाहें सिक्क्को की
क्रय शक्क्ती मेरी
आधारभूत वस्तुओ को
खरीदने में अक्क्षम हो
पर मेरे जब में हैं,
मेरी हैं,
मेरे जेब में खनकते
सिक्के कुछ कहती हैं
“Azad Sikander”
3 comments:
भाव बहुत उम्दा है..
Matches the attitude (in positive way)!
Matches the attitude (in positive way)!
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