क्या हक है मुझे,
प्यार करने का ?
क्या हक है मुझे
“उसे” अपने जीवन में जगह देने का?
क्या हक है मुझे
उससे अपने दिल कि बात कहने का?
वह भी तब जब मैं,
जनता हु कभी “उसे” अपना नहीं
बना पायुँगा
तथाकथित समाज के
नियमो के कारण
जिसको बदलने कि जिम्मेवारी
मुझ जैसों पर है
ये सवाल नहीं,
मनुष्य के भावनाओ का ख़ुराक है
इसलिये
हां मुझे हक है प्यार करने का
ये भी हक है "उसे "दु
अपने जीवन में स्थान
पर ये हक नहीं कि
"उसके"भावनाओं को ठेस पहुंचाऊ........
"Azad Sikander"
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