Thursday, October 25, 2007

उपदेश देने से !!!!!

मैं क्यु पिछे रहूँ,
जब मोका मिल रहा है,
बहती गंगा में हाथ धोने का,
उपदेश देने का,
व्यवसाय बना कर अर्थ कमाने का,

क्यु कहू सरल बाते
जो समझ में आता हो लोगो को ,
जिसे करमा मुश्किल नहीं,
चाहना मुश्किल है
जिससे बदल सकता है,
समाज का कुरूपता,
बन सकता है धरा स्वर्ग,

मैं तो उन्हें पोथी कि वह,
पेचिदी बाते कहु,
जिसे समझना मुश्किल ही नहीं,
असम्भव सा है आम लोगो के लिए
ये लुभाती है, यथार्त से दूर भागती है,
और ऐसे में
अपनी जीविका
चलती रहती है उपदेश देने से ।

"Azad Sikander"