मैखाना बुला कर कहती है,
पैमाना में शराब के संग,
पिजा गम,
पल-दो –पल ही सही,
देती है भगा गम,
पैमाना-पैमाना कहती हैं,
छलकती शराब लगा ले होठो से,
देगी कर मदहोश,
होठो से हलक तक जाते-जाते,
पीले सराब संग,
गम के आशु मिलकर,
देगी भुला,
थोडी देर के लिए गम,
सराब न मिले तो,
पैमाने में पानी संग गम,
मिला कर पी ले,
झूमते हुए भुला देगी गम,
और कुछ न मिले तो,
पैमाने में,
गम से गम को मिल के,
पी लो तो ,
भाग देती हैं गम।
"Azad Sikander"
1 comment:
gram ka najrana bhaa gaya azaad jee
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